…जब नन्हीं परी के लिए भगवान शिव का दूत बनकर आया देवघर जिला प्रशासन

..जब नन्हीं परी के लिए भगवान शिव का दूत बनकर आया देवघर जिला प्रशासन
अपने परिजन से मिलकर लौट आई खुशी

महाशिवरात्रि का मेला, लाखों का जनसैलाब। भीड़ इतनी कि नन्हीं चिंटी को भी रास्ता मिलना मुश्किल हो…ऐसे में अगर सात साल की बच्ची गुम हो जाये तो उसके उम्मीदों का बुझना लाजिमी है। हुआ यूं बाबाधाम देवघर में शुक्रवार को महाशिवरात्रि के दिन एक सात साल की बच्ची अपने परिजन से बिछुड़ कर बिलख रही थी। उम्मीदों की पंख निराशा के आंसू में बदल चुके थे। बच्ची को लगने था कि शायद ही वो अपने मां – पापा से मिल पायेगी। बाकी उनके परिजनों के बारे में क्या कहना…। लेकिन इसी बीच मानों साक्षात बाबा बैद्यानाथ ने देवदूत बनाकर जिला प्रशासन को उस बच्ची के पास भेजा। जब इस बच्ची से रोने का कारण पूछा गया तो उसने कहा कि उसके पापा नहीं मिल रहे हैं। उसे अपने पापा के पास जाना है। जिसके तुरंत बाद उसे मंदिर स्थित सूचना केंन्द्र लाया गया; जहां सबसे पहले बच्ची की हर सम्भव देखभाल सूचना कर्मियों द्वारा की गयी। तत्पश्चात सूचना कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को उसके परिजन से मिलाने हेतु सूचना केन्द्र में उदघोषणा किया। अंततः काफी मशक्कत के बाद बच्ची ने मोबाईल नम्बर की जगह किसी तरह से अपने परिजनों व समस्तीपूर स्थित अपने स्कूल का नाम बताया। ऐसे में बच्ची को परिजनों से मिलाने में काफी मुश्किल हो रही है।

सूचना सह सहायता कर्मियों की सूझ-बूझ से इंटरनेट के माध्यम से स्कूल का पता व नम्बर निकालकर स्कूल फोन कर उनके परिजनों का नम्बर प्राप्त किया गया। तत्पश्चात उनके परिजनों को फोन कर मंदिर स्थित सूचना सह सहायता केन्द्र में बच्ची की सुरक्षित होने की जानकारी दी गयी। अपने परिजनों को देखते हीं बच्ची के चेहरे पर एक अलग मुस्कान थी। बच्ची के परिजनों ने कहा कि प्रतिवर्ष शिवरात्रि मेला में वे बिहार के समस्तीपुर से यहाँ बाबा बैद्यनाथ को जलार्पण करने आते हैं। जलार्पण के पश्चात मंदिर प्रांगण में भीड़ की वजह से बच्ची कब इधर उधर हो गयी पता हीं नही चला। उन्होंने अपनी बच्ची से मिलने के पश्चात जिला प्रशासन व सूचना-सह-सहायता कर्मियों को इस कार्य के लिए दिल से धन्यवाद दिया। जिला प्रशासन ने कहा कि सूचना-सह-सहायता केन्द्रों का स्लोगन ही है ‘‘बिछुड़ों को हम मिलाते हैं’’ और हमारा कर्तव्य है कि बिछुड़े को मिलाना। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग देवघर की इस पहल की चारो ओर प्रशंसा हो रही है। कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि सात साल की नन्हीं परी के लिए जिला प्रशासन देवदूत बनकर आया था। प्रशासन के इस समर्पण ने बाबा बैद्यनाथ के प्रति लोगों की आस्था को और मजबूत की है।

इनपुट – पीआरडी, देवघर