देवघर की बेटी के इस कदम को जानकर हो जायेंगे भावुक, बोलेंगे कि ऐसी बेटी सभी को दें

एक और जहां बेटियों को आज भी समाज में बोझ माना जाता है, दहेज रूपी दानव बेटियों के पिता को लील जाने को तैयार बैठा है वहीं पर  देवघर (झारखंड) की एक ऐसी बेटी है जिसकी कर्तव्य निष्ठा को देखकर आपके आंखों में आंसू आ आयेगा, गर्व से सीना चौड़ा हो जायेगा, दिल गदगद हो उठेगा और आप कहेंगे कि भगवान ऐसी बेटी सभी को दें। देवघर की बेटी श्वेता ने बेटी, बहू और बेटे… तीनों का फर्ज एक साथ अदा कर समाज को एक अभिनव संदेश दिया है। दरअसल श्वेता शर्मा के ससुर जटेश झा ( 95) का निधन गत 9 सितंबर को प्रातः हो गई, जटेश बाबू के बेटे का निधन तीन साल पहले कैंसर के कारण हो चुका था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल मुखाग्नि कौन देगा इसको लेकर था, चूंकि हिन्दू धर्म के मान्यता अनुसार मुखाग्नि पुत्र, भतीजा, पोता ही देता है बेटियां कभी मुखाग्नि नहीं देती….श्वेता ने धर्म और रूढ़िवादिता की जंजीरो को तोड़कर अपने दिवगंत ससुर को मुखाग्नि खुःद करने का फैसला लिया। श्वेता के इस फैसले पर शुरू – शुरू में समाज के कुछ लोगों ने एतराज जताया लेकिन श्वेता के संकल्प के सामने वे भी झूक गए और श्वेता ने अपने ससुर जटेश झा को न केवल मुखाग्नि दिया बल्कि कर्ता बनकर पूरा क्रियाक्रम भी अपने हाथों से संपन्न करवाया।

समाज के द्वारा बांधी गई बेड़ियों को तोड़कर निकल पड़ी देवघर की बेटी श्वेता
समाज के द्वारा बांधी गई बेड़ियों को तोड़कर निकल पड़ी देवघर की बेटी श्वेता

गौरतलब है कि श्वेता शर्मा देवघर के विवेकानंद मध्य विद्यालय में शिक्षिका हैं उनके पति संजय झा सात वर्ष तक लगातार कैंसर से जुझने के बाद 9 सिंतबर 2015 को इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे । पूरे घर की जिम्मेवारी उनके कंधे पर थी, श्वेता के ससुर जटेश झा भी बिमार रहा करते थे। जटेश बाबू को श्वेता ने अपनी बेटी की तरह सेवा की… जटेश बाबू भी अपनी बहु को बेटी मानते थे, लोगों का कहना था कि जटेश बाबू की अंतिम इच्छा थी मरने के बाद उसकी मुखाग्नि उसकी पुत्रबधु यानी श्वेता ही दे, उनकी अंतिम इच्छा को श्वेता शर्मा ने पूरा किया। श्वेता के इस कदम की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। आजकल जहां समाज में बहुओं के द्वारा सास – ससुर को नजरअंदाज करने व सास – ससुर के द्वारा बहुओं का उत्पीड़न होना, दहेज न देने के कारण बहुओं को जिंदा जलाने के खबरें आती रहती है वैसे में श्वेता के इस कदम ने समाज में पत्थर में लकीर खिंचने का काम किया है। शहरवासी मुक्त कंठ से जटेश बाबू की पुत्रवधु श्वेता शर्मा की सराहना कर रहे हैं। मयंक बताते हैं कि शव यात्रा जिस रास्ते से गुजर रहा था, इस दृश्य को देखकर हर कोई अचंभित थे साथ ही लोग श्वेता शर्मा के हिम्मत की दाद देते नहीं थक  रहे थे और सबसे मुंह से एक ही शब्द निकल रहा था कि बाबा बैद्यनाथ ऐसी बहु-बेटी सबको दें।

(मयंक राय से बातचीत के आधार पर)